गर्मी की वो रात
गर्मी से भरी रात में
ठंडी हवा कहाँ खो गयी ।
मै जाग रहा था
नींद कहाँ से लेकर आऊं।
पत्ता भी हिल नहीं पाया
रात भर स्थिर थे हरे हरे पेड़ ।
झुलस रहा था सारा तन
ठंडक कहाँ से लेकर आऊं ।
तुम्हारे हाथों की ठंडक लेकर
पंखी की हल्की हल्की सी हवा
दे रही थी दवा।
रात भर जागी तुम
मै सो रहा था।
मेरी आँखें बंद थी
फिर भी तुम्हे देख रहा था।
रात भर जागी तुम्हारी आँखें
फिर भी ताज़गी से
निहार रही थी आँखें।
सुबह कह रही थी मुझसे
गर्मी की वो रात हार गई
Saturday, September 17, 2011
Friday, September 16, 2011
"ब्रह्मचारी बनो, पेट्रोल बचाओ "
मेरे एक मित्र है शुब जी , वे हर शनिवार को एक नया टी शर्ट पहन कर आते और उस पर कुच्छ ना कुच्छ लिखा होता है वे कल एक टी शर्ट पहन कर आयेंगे जिस पर लिखा होगा "ब्रह्मचारी बनो, पेट्रोल बचाओ "। सुभ जी की बात में दम है और भविष्य में सरकारी नारा भी हो सकता है !
पूर्ण ब्रह्मचारी का एक फायदा नहीं अनेक फायदे है , आप को किसी से प्यार नहीं होगा और आपकी मंगेतर, महिला मित्र को गाडी में घुमाना नहीं पड़ेगा। शोपिंग का भी खर्चा बच जायेगा , पिज्जा बर्गर और फिल्म का टिकिट भी नहीं लेना पड़ेगा । एक छोटे से व्रत के अनेको फायदे है। शादी नहीं होगी तो बच्चे नहीं होंगे और जनसंख्या पर स्वत: नियंत्रण हो जायेगा। शादी तक बात ही नहीं होगी क्योकि आप अभिमन्यु बनेगे ही नहीं, मंहगाई के चक्र्य व्यूह में फंसगे भी नहीं और आप बेफिक्र होकर कलयुग की ध्रतराष्ट सरकार को वोट देते रहेंगे।
"ब्रह्मचारी बनो, पेट्रोल बचाओ "
पूर्ण ब्रह्मचारी का एक फायदा नहीं अनेक फायदे है , आप को किसी से प्यार नहीं होगा और आपकी मंगेतर, महिला मित्र को गाडी में घुमाना नहीं पड़ेगा। शोपिंग का भी खर्चा बच जायेगा , पिज्जा बर्गर और फिल्म का टिकिट भी नहीं लेना पड़ेगा । एक छोटे से व्रत के अनेको फायदे है। शादी नहीं होगी तो बच्चे नहीं होंगे और जनसंख्या पर स्वत: नियंत्रण हो जायेगा। शादी तक बात ही नहीं होगी क्योकि आप अभिमन्यु बनेगे ही नहीं, मंहगाई के चक्र्य व्यूह में फंसगे भी नहीं और आप बेफिक्र होकर कलयुग की ध्रतराष्ट सरकार को वोट देते रहेंगे।
"ब्रह्मचारी बनो, पेट्रोल बचाओ "
अब जोधपुर दूर नहीं,
मै फलोदी से जोधपुर का टूर महीने में ८-९ बार कर लेता हूँ। सड़क मार्ग से यात्रा करना किसी प्रताड़ना से कम नहीं है, लेकिन अब ये मार्ग थ्री लेंन का बनाने जा रहा है। मुझे सुखद अनुभव जब होता जब इस मार्ग में ३-४ बोर्ड पढ़ने को मिलते, उन बोर्ड से साफ़ कि अब ४० मिनट का समय कम लगेगा । साफ़ शब्दों में कहना होगा कि मार्ग में ३ बायपास माणकलाव-मथानिया , मथानिया-उमेद्नगर और ओसिय-बिकम्कौर बनेगे और रेल फाटक से निजात मिल जाएगी ।
जब मुख्यमंत्री ने नयी सड़क के निर्माण का शिलान्यास किया था हमारे विधायक महोदय ने रेल फाटकों की समस्या रखी और हाथो हाथ बायपास निर्माण की स्वीकृति भी दिलवा दी और काम भी शुरू हो गया। माननीय विधायक महोदय द्वारा फलोदी के हित में महत्त्व पूर्ण कार्य करवाना बड़ी उपलब्धि है जो वर्षो से हमारे लिए सपना बन कर रह गया , अब साकार हो रहा है। अब जोधपुर फलोदी के और नजदीक आ गया है और अब आराम दायक सफ़र के साथ साथ २ घंटे में जोधपुर पंहुच जायेंगे।
जब मुख्यमंत्री ने नयी सड़क के निर्माण का शिलान्यास किया था हमारे विधायक महोदय ने रेल फाटकों की समस्या रखी और हाथो हाथ बायपास निर्माण की स्वीकृति भी दिलवा दी और काम भी शुरू हो गया। माननीय विधायक महोदय द्वारा फलोदी के हित में महत्त्व पूर्ण कार्य करवाना बड़ी उपलब्धि है जो वर्षो से हमारे लिए सपना बन कर रह गया , अब साकार हो रहा है। अब जोधपुर फलोदी के और नजदीक आ गया है और अब आराम दायक सफ़र के साथ साथ २ घंटे में जोधपुर पंहुच जायेंगे।
Sunday, September 11, 2011
पुष्करना समाज के साथ तथाकथित युवतिया का अभद्र आचरण
मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि फेस बुक पर कई पुष्करना युवतियों के आई डी बने हुए है जैसे ??????? पुरोहित। ????????थानवी,????????????व्यास,??????????????बोहरा आदि, या तो ये आई डी फेक है या फिर ये युवतिया अश्लीलता की हद को पर कर कर रही है। बेहद ही अश्लील सामग्री अपनी वाल पर पोस्ट करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं कर रही है। इनकी वाल पोस्ट पर ज्यादातर युवतिया भद्दे वाक्य लिखती है, जो हमारे समाज के लिए बेहद ही शर्मनाक बात है।
ऐसे कृत्य हमारे समाज से जुड़े किसी युवक और युवती नहीं कर सकते, अगर हमारे समाज से जुदा कोई भी ये कृत्य कर रहा है तो ये वो लोग है जो संस्कारो के आभाव में पले है। मेरा सभी पुष्करना बंधुओ से निवेव्दन है कि वे ऐसे प्रोफाइल का बहिष्कार कर इन्हें ब्लेक लिस्ट में रखे और समाज को प्रदूषित करने वाली इन तथाकथित युवतियों को सबक सिखाया जाना चाहिए!
मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि फेस बुक पर कई पुष्करना युवतियों के आई डी बने हुए है जैसे ??????? पुरोहित। ????????थानवी,????????????व्यास,??????????????बोहरा आदि, या तो ये आई डी फेक है या फिर ये युवतिया अश्लीलता की हद को पर कर कर रही है। बेहद ही अश्लील सामग्री अपनी वाल पर पोस्ट करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं कर रही है। इनकी वाल पोस्ट पर ज्यादातर युवतिया भद्दे वाक्य लिखती है, जो हमारे समाज के लिए बेहद ही शर्मनाक बात है।
ऐसे कृत्य हमारे समाज से जुड़े किसी युवक और युवती नहीं कर सकते, अगर हमारे समाज से जुदा कोई भी ये कृत्य कर रहा है तो ये वो लोग है जो संस्कारो के आभाव में पले है। मेरा सभी पुष्करना बंधुओ से निवेव्दन है कि वे ऐसे प्रोफाइल का बहिष्कार कर इन्हें ब्लेक लिस्ट में रखे और समाज को प्रदूषित करने वाली इन तथाकथित युवतियों को सबक सिखाया जाना चाहिए!
Friday, June 17, 2011
सभ्य सुन्दरियों का मुर्ख अंदाज़
सभ्य सुन्दरियों का मुर्ख अंदाज़
मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि ट्रेफिक स्टॉप पर ट्रेफिक पुलिस लड़कियों के चालान काटती है, कारन हेलमेट नहीं पहना। शहर की ये सुंदर बालाए गर्मी से बचने के लिए हाथो को दस्तानो से ढकती है और चेहरे को पुरे नकाब से ढकती है क्योकि वे सूरज की गर्मी से अपनी त्वचा को काला होने से बचा सके । अगर सर से ज्यादा चमड़ी फ़िक्र की जावे तो इसे मुर्खता ही कहा जायेगा, अगर चमड़ी काली हो जाएगी तो भी जिन्दा रहेंगे लेकिन अगर सर अगर काला (चोटिल) हो जाए तो दुनिया को अलविदा कहना पड़ सकता है। अगर इन सभ्य सुन्दरियों को ये समझ में आ जावे कि मास्क और दस्तानो से ज्यादा हेलमेट पहना जरूरी है, दुनिया मान चुकी है ज्यादातर सड़क हादसे में मरने का कारण सर में चोट लगाना है।
मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि ट्रेफिक स्टॉप पर ट्रेफिक पुलिस लड़कियों के चालान काटती है, कारन हेलमेट नहीं पहना। शहर की ये सुंदर बालाए गर्मी से बचने के लिए हाथो को दस्तानो से ढकती है और चेहरे को पुरे नकाब से ढकती है क्योकि वे सूरज की गर्मी से अपनी त्वचा को काला होने से बचा सके । अगर सर से ज्यादा चमड़ी फ़िक्र की जावे तो इसे मुर्खता ही कहा जायेगा, अगर चमड़ी काली हो जाएगी तो भी जिन्दा रहेंगे लेकिन अगर सर अगर काला (चोटिल) हो जाए तो दुनिया को अलविदा कहना पड़ सकता है। अगर इन सभ्य सुन्दरियों को ये समझ में आ जावे कि मास्क और दस्तानो से ज्यादा हेलमेट पहना जरूरी है, दुनिया मान चुकी है ज्यादातर सड़क हादसे में मरने का कारण सर में चोट लगाना है।
Friday, May 20, 2011
संक्रमित थियेटर में समाज का आपरेसन
आज स्थानीय समाचार पत्र में पढ़ा कि पुष्करण समाज मुंबई और फलोदी में मीटिंग हुए और समाज में विवाह में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध माहौल तैयार करना और इन्हें जड़ से मिटाने का संकल्प लिया गया है। कई पुष्करना वक्तो ने कई समाज सुधार के लिए विचार रखे , कई के तो फोटो भी समाचार पत्र में देखे । प्रयास सराहनीय है।
मुझे स्थानीय समाचार पत्र की खबर एक सप्ताह पूर्व मेरी माता जी ने इस खबर को विस्तार से मुझे बताया था, मेरी माताजी मात्र ५वी क्लास पास है लेकिन वे अखबार रोज पढती है और गौर भी करती है, मेरी माताजी ने ये खबर बताने के बाद ये सवाल किया कि सब कुच्छ ठीक है लेकिन जो ये मीटिंग कर रहे उन लोगो का बेक ग्राउंड क्या है, उनके बेटो की शादिया किस प्रकार संपन हुए है
१। क्या समाज को मालूम है!
२। मिलानिया कितने की थी!
३। दहेज़ और फिक्स डिपोजिट कितना लिया था!
४। बारात में कितना बारूद फूंका था!
५। लड़की वालो के यंहा कितनी बार भोजन की प्रीति की थी!
६। कितना सोना दहेज़ में था !
७। कितनी बार लिफाफे(मिलानिया) लिए
जब नेता और अफसर आपनी सम्पति की घोषणा कर रहे तो क्या हमारे समाज सुधारक इतनी घोषणा करने का साहस रखते है कि वे जिस मंच से समाज सुधार की बाते कर रहे वे इन कुरीतियों से किनारा कर चुके है क्या! वे कतई नहीं कहेगे कि और बात से किनारा करेंगे। एक पुष्करना सज्जन ने यह तक कह दिया की उनका बेटा गोल्ड है और गोल्ड के भाव ही किसी घर का जंवाई बनेगा। अच्छे पढ़े लिखे पुष्करना युवाओ की कीमत बेटे वाले ही नहीं बेटी वाले भी आंक रहे है , जब ये समाज सुधारक मंच से नीचे उतरते है तो शादी के जोड़ बाकी में लग जाते है। अगर इन समाज सुधारको में साहस है तो वे आगे आये और बताये किस गरीब की बेटी को बहु बनाया है, कितनी सादगी से अपने बेटो का विवाह किया है, अगर दहेज़ और मिलानिया नहीं ली है तो समाज के सामने अपना उदहारण रखे ताकि हम उन्हें सम्मान भरी नजर से देखकर उनका अनुसरण कर सके।
आज स्थानीय समाचार पत्र में पढ़ा कि पुष्करण समाज मुंबई और फलोदी में मीटिंग हुए और समाज में विवाह में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध माहौल तैयार करना और इन्हें जड़ से मिटाने का संकल्प लिया गया है। कई पुष्करना वक्तो ने कई समाज सुधार के लिए विचार रखे , कई के तो फोटो भी समाचार पत्र में देखे । प्रयास सराहनीय है।
मुझे स्थानीय समाचार पत्र की खबर एक सप्ताह पूर्व मेरी माता जी ने इस खबर को विस्तार से मुझे बताया था, मेरी माताजी मात्र ५वी क्लास पास है लेकिन वे अखबार रोज पढती है और गौर भी करती है, मेरी माताजी ने ये खबर बताने के बाद ये सवाल किया कि सब कुच्छ ठीक है लेकिन जो ये मीटिंग कर रहे उन लोगो का बेक ग्राउंड क्या है, उनके बेटो की शादिया किस प्रकार संपन हुए है
१। क्या समाज को मालूम है!
२। मिलानिया कितने की थी!
३। दहेज़ और फिक्स डिपोजिट कितना लिया था!
४। बारात में कितना बारूद फूंका था!
५। लड़की वालो के यंहा कितनी बार भोजन की प्रीति की थी!
६। कितना सोना दहेज़ में था !
७। कितनी बार लिफाफे(मिलानिया) लिए
जब नेता और अफसर आपनी सम्पति की घोषणा कर रहे तो क्या हमारे समाज सुधारक इतनी घोषणा करने का साहस रखते है कि वे जिस मंच से समाज सुधार की बाते कर रहे वे इन कुरीतियों से किनारा कर चुके है क्या! वे कतई नहीं कहेगे कि और बात से किनारा करेंगे। एक पुष्करना सज्जन ने यह तक कह दिया की उनका बेटा गोल्ड है और गोल्ड के भाव ही किसी घर का जंवाई बनेगा। अच्छे पढ़े लिखे पुष्करना युवाओ की कीमत बेटे वाले ही नहीं बेटी वाले भी आंक रहे है , जब ये समाज सुधारक मंच से नीचे उतरते है तो शादी के जोड़ बाकी में लग जाते है। अगर इन समाज सुधारको में साहस है तो वे आगे आये और बताये किस गरीब की बेटी को बहु बनाया है, कितनी सादगी से अपने बेटो का विवाह किया है, अगर दहेज़ और मिलानिया नहीं ली है तो समाज के सामने अपना उदहारण रखे ताकि हम उन्हें सम्मान भरी नजर से देखकर उनका अनुसरण कर सके।
Sunday, May 8, 2011
मुझे नहीं मालूम था कि आज मदर्स डे है, जब मालूम पड़ा तो मुझे मेरी माँ क़ी माताजी यानि मेरी नानी मुझे याद आ गयी। आज भी याद आता है जब में ननिहाल जाता था तो मुझे १ रूपया देती थी और मुझे ऐसा लगता था कि दुनिया सारी ख़ुशी उस एक रुपये में है। जीरे का तड़का लगा कर आलू की सब्जी बनाती थी, क्या स्वाद होता था और कोकम डाल कर दाल बनती थी । उस स्वाद और स्नेह को आज भी याद करता हूँ क्योकि मेरी नानी दुःख में रहकर भी मुझ पर स्नेह लुटाती थी। आज उस स्नेहमयी आत्मा को प्रणाम करता हूँ।
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