आज युवा चाहे वो लड़का हो लड़की अथाह प्रतिभा के धनी होते , युवाओ की प्रतिभा पर संदेह करना संकुचित मानसिकता का परिचायक है। पुष्करण प्रतिभा पर पहली चोट परिवार से तो दूसरी चोट समाज करता है। प्रतिभा रुपी पौध जड़े जमाने से पहले ही मुरझा जाता है।
मे भारतीय क्रिकेट के स्टार खिलाडी युवराज के पिता श्री योगराज सिंह का जिक्र करना चाहूँगा, क्रिकेट खेलते चोटिल हुए और कभी अंतर्राष्ट्रीय मेच खेल नहीं पाए, उन्होंने तय कर लिया ki युवी को स्टार क्रिक्केटर बनाकर ही रहेंगे और युवी स्टार खिलाडी बन भी गए।
एक दौर वो भी आया की युवी की टीम मे जगह खतरे मे पड़ gई। लेकिंग युवी के पिता वो कार्य किया कि युवी फिर फिट होकर टीम मे लौट आये । एक पिता कि मेहनत का परिणाम सामने है
युवी का विश्व कप मे जबरदस्त प्रदर्शन जारी है।
मै युवाओ से कहना चाहूँगा के वे अपने अभिभावकों के मार्ग दर्शन मे सफलता के पायदान चढ़े ।
अभिभावक भी युवाओ के सपने साकार करने मे सहयोग करे।
Wednesday, March 9, 2011
Sunday, March 6, 2011
आखिर कब तक प्रसूता मरती रहेगी
आज सुबह अखबार देखा तो दुःख हुआ १५ वी प्रसूता की मौत उम्मेद हॉस्पिटल मे हो चुकी थी। संक्रमित गुल्कोस की सप्लाई रुक चुकी है लेकिन हॉस्पिटल मे फैला संक्रमण यमराज बना हुआ है !
मुख्यमंत्री के गृह नगर के ये विकट हालत रो रो कर कह रहे कि कंही सिस्टम मे संक्रमण है ,महिलाओ के लिए संघर्ष करने वाले संघठन मौन होकर मौत का तमासा देख रहे है। रास्ट्रीय महिला महिला आयोग ने इस प्रकरण की तरफ नजर ही नहीं दौड़ाई ! क्या एक परिवार आने वाली ख़ुशी को पाने के लिए ऐसे संक्रमित हॉस्पिटल के दरवाजे पर कदम रखे या नहीं ? क्या उनकी पत्नी, बहु, बेटी, सकुशल घर लौट पायेगी? इस सवाल मात्र से सिहरन पैदा हो जाती है तो इस हॉस्पिटल मे इलाज ले रही है , उनके मन मे कितना खोफ होगा!
Friday, March 4, 2011
होली का पर्व नजदीक आ रहा है हमारा दायित्व है की इस होली पर फेस बुक के साथियों में से एक ऐसे साथी को चुना जाना जो मामा श्री की पदवी से सम्मानित करने योग्य हो, भारतीय चित्रपट के विराट अभिनेता अक्षय कुमार एक बार फिर पिता बनने जा रहे है। सभी साथियों से निवेदन है की वे आपनी बेबाक राय के साथ योग्य साथी का नाम प्रेषित करे।
Sunday, November 14, 2010
Saturday, September 11, 2010
कल आजतक चेनल पर देश के राष्टीय संतो के कारनामे देखकर मुझे गर्व हुआ कि मै भी अंतरास्ट्रीय संत बन सकता हूँ। एक संत काले धन को सफ़ेद करने के गुर सिखा रहा है। एक संत पुलिस वाले के हत्या के आरोपी को अपने आश्रम में शरण देने की बात कहता है। तो एक संत ११ मुखी रुद्रख्स की कीमत लाखो में बताता है। मै ये चिंतन कर रहा कि हिन्दू धर्म व्यावसायिक संतो को हम क्यों स्वीकार कर रहे है। जय हो कॉरपरेट बाबाजी।
Wednesday, August 11, 2010
Tuesday, August 10, 2010
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