Friday, June 17, 2011

सभ्य सुन्दरियों का मुर्ख अंदाज़

सभ्य सुन्दरियों का मुर्ख अंदाज़

मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि ट्रेफिक स्टॉप पर ट्रेफिक पुलिस लड़कियों के चालान काटती है, कारन हेलमेट नहीं पहना। शहर की ये सुंदर बालाए गर्मी से बचने के लिए हाथो को दस्तानो से ढकती है और चेहरे को पुरे नकाब से ढकती है क्योकि वे सूरज की गर्मी से अपनी त्वचा को काला होने से बचा सके । अगर सर से ज्यादा चमड़ी फ़िक्र की जावे तो इसे मुर्खता ही कहा जायेगा, अगर चमड़ी काली हो जाएगी तो भी जिन्दा रहेंगे लेकिन अगर सर अगर काला (चोटिल) हो जाए तो दुनिया को अलविदा कहना पड़ सकता है। अगर इन सभ्य सुन्दरियों को ये समझ में आ जावे कि मास्क और दस्तानो से ज्यादा हेलमेट पहना जरूरी है, दुनिया मान चुकी है ज्यादातर सड़क हादसे में मरने का कारण सर में चोट लगाना है।

Friday, May 20, 2011

संक्रमित थियेटर में समाज का आपरेसन

आज स्थानीय समाचार पत्र में पढ़ा कि पुष्करण समाज मुंबई और फलोदी में मीटिंग हुए और समाज में विवाह में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध माहौल तैयार करना और इन्हें जड़ से मिटाने का संकल्प लिया गया है। कई पुष्करना वक्तो ने कई समाज सुधार के लिए विचार रखे , कई के तो फोटो भी समाचार पत्र में देखे । प्रयास सराहनीय है।

मुझे स्थानीय समाचार पत्र की खबर एक सप्ताह पूर्व मेरी माता जी ने इस खबर को विस्तार से मुझे बताया था, मेरी माताजी मात्र ५वी क्लास पास है लेकिन वे अखबार रोज पढती है और गौर भी करती है, मेरी माताजी ने ये खबर बताने के बाद ये सवाल किया कि सब कुच्छ ठीक है लेकिन जो ये मीटिंग कर रहे उन लोगो का बेक ग्राउंड क्या है, उनके बेटो की शादिया किस प्रकार संपन हुए है

१। क्या समाज को मालूम है!
२। मिलानिया कितने की थी!
३। दहेज़ और फिक्स डिपोजिट कितना लिया था!
४। बारात में कितना बारूद फूंका था!
५। लड़की वालो के यंहा कितनी बार भोजन की प्रीति की थी!
६। कितना सोना दहेज़ में था !
७। कितनी बार लिफाफे(मिलानिया) लिए


जब नेता और अफसर आपनी सम्पति की घोषणा कर रहे तो क्या हमारे समाज सुधारक इतनी घोषणा करने का साहस रखते है कि वे जिस मंच से समाज सुधार की बाते कर रहे वे इन कुरीतियों से किनारा कर चुके है क्या! वे कतई नहीं कहेगे कि और बात से किनारा करेंगे। एक पुष्करना सज्जन ने यह तक कह दिया की उनका बेटा गोल्ड है और गोल्ड के भाव ही किसी घर का जंवाई बनेगा। अच्छे पढ़े लिखे पुष्करना युवाओ की कीमत बेटे वाले ही नहीं बेटी वाले भी आंक रहे है , जब ये समाज सुधारक मंच से नीचे उतरते है तो शादी के जोड़ बाकी में लग जाते है। अगर इन समाज सुधारको में साहस है तो वे आगे आये और बताये किस गरीब की बेटी को बहु बनाया है, कितनी सादगी से अपने बेटो का विवाह किया है, अगर दहेज़ और मिलानिया नहीं ली है तो समाज के सामने अपना उदहारण रखे ताकि हम उन्हें सम्मान भरी नजर से देखकर उनका अनुसरण कर सके।

Sunday, May 8, 2011

मुझे नहीं मालूम था कि आज मदर्स डे है, जब मालूम पड़ा तो मुझे मेरी माँ क़ी माताजी यानि मेरी नानी मुझे याद आ गयी। आज भी याद आता है जब में ननिहाल जाता था तो मुझे १ रूपया देती थी और मुझे ऐसा लगता था कि दुनिया सारी ख़ुशी उस एक रुपये में है। जीरे का तड़का लगा कर आलू की सब्जी बनाती थी, क्या स्वाद होता था और कोकम डाल कर दाल बनती थी । उस स्वाद और स्नेह को आज भी याद करता हूँ क्योकि मेरी नानी दुःख में रहकर भी मुझ पर स्नेह लुटाती थी। आज उस स्नेहमयी आत्मा को प्रणाम करता हूँ।

Saturday, April 30, 2011

कल मई महीना सुरू हो जाएगा और २८ मई को मेरा दूसरा जन्म दिन है मौत से सीधा सामना हुआ था लेकिन मुझे ख़ुशी नहीं उदासी लग रही है मैंने अपनी आँखों के सामने २ मासूम बच्चियों को दम तोड़ते देखा था और उनकी माँ सहित ७ जाने दम तोड़ चुके थे। २८/५/२००४ की दोपहर की घटना , कैसे भूलू.............वो दो खुबसूरत चहरे मुझे आज भी याद आते है। ३ से ५ साल के बीच थी वो दोनों फूल सी बच्चियाँ ............मेरे इश्वर! वो जन्हा भी हो खुश रहे........

Wednesday, April 27, 2011

धन्यवाद राज ठाकरे
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना चित्रपट कर्मचारी संगठन ने बिग बी की फिल्म ‘बुड्ढा’ की यूनाइटेड मिल्स में चल रही शूटिंग रुकवा दी। अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘बुड्ढा’ के एक डांस सीन में कुछ विदेशी कलाकार बिना वर्क परमिट के काम कर रहे हैं। इसके बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन को सूचना देकर फिल्म की शूटिंग रुकवा दी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार करीब २७ विदेशी डांसरों के पास वर्क परमिट नहीं पाया गया है।
इस खबर से स्पस्ट हो गया है की बॉलीवुड के निर्माता और निर्देशक गोरी चमड़ी की गन्दी मानसिकता का पालन पोषण कर रहे है। ये रंग भेद का सबसे बड़ा उदहारण है कि बॉलीवुड है की हरेक film ke गाने में विदेशी बलाए नाचती नजर आ जायेगी। भारतीय प्रतिभाए चित्रपट की कला को छोड़कर रोटी रोज़ी का दूसरा रास्ता अपना रहे है। धन्यवाद है राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ताओ को जिन्होंने विधि विरुद्ध कार्य करे विदेशी कलाकारों को पकड़ा और शूटिंग रूकवाई , बॉलीवुड का ये नया चेहरा कला और कलाकारों के लिए खतरनाक है जो भारतीय कलाकारों के फन की कब्र खोद रहा है और विदेशी लोगो को बगैर वर्क वीजा के बॉलीवुड में काम दे रहा है।

अगर समय के साथ हम नहीं चेते तो बॉलीवुड का ये नया रूप सिनेमा हाल में भारतीय कला की मजाक उडाएगा। धन्यवाद राज ठाकरे, आपके प्रयास को सलाम करता हूँ।

Wednesday, March 9, 2011

आज युवा चाहे वो लड़का हो लड़की अथाह प्रतिभा के धनी होते , युवाओ की प्रतिभा पर संदेह करना संकुचित मानसिकता का परिचायक है। पुष्करण प्रतिभा पर पहली चोट परिवार से तो दूसरी चोट समाज करता है। प्रतिभा रुपी पौध जड़े जमाने से पहले ही मुरझा जाता है।
मे भारतीय क्रिकेट के स्टार खिलाडी युवराज के पिता श्री योगराज सिंह का जिक्र करना चाहूँगा, क्रिकेट खेलते चोटिल हुए और कभी अंतर्राष्ट्रीय मेच खेल नहीं पाए, उन्होंने तय कर लिया ki युवी को स्टार क्रिक्केटर बनाकर ही रहेंगे और युवी स्टार खिलाडी बन भी गए।
एक दौर वो भी आया की युवी की टीम मे जगह खतरे मे पड़ gई। लेकिंग युवी के पिता वो कार्य किया कि युवी फिर फिट होकर टीम मे लौट आये । एक पिता कि मेहनत का परिणाम सामने है
युवी का विश्व कप मे जबरदस्त प्रदर्शन जारी है।
मै युवाओ से कहना चाहूँगा के वे अपने अभिभावकों के मार्ग दर्शन मे सफलता के पायदान चढ़े ।
अभिभावक भी युवाओ के सपने साकार करने मे सहयोग करे।

Sunday, March 6, 2011

आखिर कब तक प्रसूता मरती रहेगी

आज सुबह अखबार देखा तो दुःख हुआ १५ वी प्रसूता की मौत उम्मेद हॉस्पिटल मे हो चुकी थीसंक्रमित गुल्कोस की सप्लाई रुक चुकी है लेकिन हॉस्पिटल मे फैला संक्रमण यमराज बना हुआ है !

मुख्यमंत्री के गृह नगर के ये विकट हालत रो रो कर कह रहे कि कंही सिस्टम मे संक्रमण है ,महिलाओ के लिए संघर्ष करने वाले संघठन मौन होकर मौत का तमासा देख रहे हैरास्ट्रीय महिला महिला आयोग ने इस प्रकरण की तरफ नजर ही नहीं दौड़ाई ! क्या एक परिवार आने वाली ख़ुशी को पाने के लिए ऐसे संक्रमित हॉस्पिटल के दरवाजे पर कदम रखे या नहीं ? क्या उनकी पत्नी, बहु, बेटी, सकुशल घर लौट पायेगी? इस सवाल मात्र से सिहरन पैदा हो जाती है तो इस हॉस्पिटल मे इलाज ले रही है , उनके मन मे कितना खोफ होगा!