Friday, September 16, 2011

अब जोधपुर दूर नहीं,

मै फलोदी से जोधपुर का टूर महीने में ८-९ बार कर लेता हूँ। सड़क मार्ग से यात्रा करना किसी प्रताड़ना से कम नहीं है, लेकिन अब ये मार्ग थ्री लेंन का बनाने जा रहा है। मुझे सुखद अनुभव जब होता जब इस मार्ग में ३-४ बोर्ड पढ़ने को मिलते, उन बोर्ड से साफ़ कि अब ४० मिनट का समय कम लगेगा । साफ़ शब्दों में कहना होगा कि मार्ग में ३ बायपास माणकलाव-मथानिया , मथानिया-उमेद्नगर और ओसिय-बिकम्कौर बनेगे और रेल फाटक से निजात मिल जाएगी ।

जब मुख्यमंत्री ने नयी सड़क के निर्माण का शिलान्यास किया था हमारे विधायक महोदय ने रेल फाटकों की समस्या रखी और हाथो हाथ बायपास निर्माण की स्वीकृति भी दिलवा दी और काम भी शुरू हो गया। माननीय विधायक महोदय द्वारा फलोदी के हित में महत्त्व पूर्ण कार्य करवाना बड़ी उपलब्धि है जो वर्षो से हमारे लिए सपना बन कर रह गया , अब साकार हो रहा है। अब जोधपुर फलोदी के और नजदीक आ गया है और अब आराम दायक सफ़र के साथ साथ २ घंटे में जोधपुर पंहुच जायेंगे।

Sunday, September 11, 2011

पुष्करना समाज के साथ तथाकथित युवतिया का अभद्र आचरण

मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि फेस बुक पर कई पुष्करना युवतियों के आई डी बने हुए है जैसे ??????? पुरोहित। ????????थानवी,????????????व्यास,??????????????बोहरा आदि, या तो ये आई डी फेक है या फिर ये युवतिया अश्लीलता की हद को पर कर कर रही है। बेहद ही अश्लील सामग्री अपनी वाल पर पोस्ट करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं कर रही है। इनकी वाल पोस्ट पर ज्यादातर युवतिया भद्दे वाक्य लिखती है, जो हमारे समाज के लिए बेहद ही शर्मनाक बात है।

ऐसे कृत्य हमारे समाज से जुड़े किसी युवक और युवती नहीं कर सकते, अगर हमारे समाज से जुदा कोई भी ये कृत्य कर रहा है तो ये वो लोग है जो संस्कारो के आभाव में पले है। मेरा सभी पुष्करना बंधुओ से निवेव्दन है कि वे ऐसे प्रोफाइल का बहिष्कार कर इन्हें ब्लेक लिस्ट में रखे और समाज को प्रदूषित करने वाली इन तथाकथित युवतियों को सबक सिखाया जाना चाहिए!

Friday, June 17, 2011

सभ्य सुन्दरियों का मुर्ख अंदाज़

सभ्य सुन्दरियों का मुर्ख अंदाज़

मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि ट्रेफिक स्टॉप पर ट्रेफिक पुलिस लड़कियों के चालान काटती है, कारन हेलमेट नहीं पहना। शहर की ये सुंदर बालाए गर्मी से बचने के लिए हाथो को दस्तानो से ढकती है और चेहरे को पुरे नकाब से ढकती है क्योकि वे सूरज की गर्मी से अपनी त्वचा को काला होने से बचा सके । अगर सर से ज्यादा चमड़ी फ़िक्र की जावे तो इसे मुर्खता ही कहा जायेगा, अगर चमड़ी काली हो जाएगी तो भी जिन्दा रहेंगे लेकिन अगर सर अगर काला (चोटिल) हो जाए तो दुनिया को अलविदा कहना पड़ सकता है। अगर इन सभ्य सुन्दरियों को ये समझ में आ जावे कि मास्क और दस्तानो से ज्यादा हेलमेट पहना जरूरी है, दुनिया मान चुकी है ज्यादातर सड़क हादसे में मरने का कारण सर में चोट लगाना है।

Friday, May 20, 2011

संक्रमित थियेटर में समाज का आपरेसन

आज स्थानीय समाचार पत्र में पढ़ा कि पुष्करण समाज मुंबई और फलोदी में मीटिंग हुए और समाज में विवाह में व्याप्त कुरीतियों के विरुद्ध माहौल तैयार करना और इन्हें जड़ से मिटाने का संकल्प लिया गया है। कई पुष्करना वक्तो ने कई समाज सुधार के लिए विचार रखे , कई के तो फोटो भी समाचार पत्र में देखे । प्रयास सराहनीय है।

मुझे स्थानीय समाचार पत्र की खबर एक सप्ताह पूर्व मेरी माता जी ने इस खबर को विस्तार से मुझे बताया था, मेरी माताजी मात्र ५वी क्लास पास है लेकिन वे अखबार रोज पढती है और गौर भी करती है, मेरी माताजी ने ये खबर बताने के बाद ये सवाल किया कि सब कुच्छ ठीक है लेकिन जो ये मीटिंग कर रहे उन लोगो का बेक ग्राउंड क्या है, उनके बेटो की शादिया किस प्रकार संपन हुए है

१। क्या समाज को मालूम है!
२। मिलानिया कितने की थी!
३। दहेज़ और फिक्स डिपोजिट कितना लिया था!
४। बारात में कितना बारूद फूंका था!
५। लड़की वालो के यंहा कितनी बार भोजन की प्रीति की थी!
६। कितना सोना दहेज़ में था !
७। कितनी बार लिफाफे(मिलानिया) लिए


जब नेता और अफसर आपनी सम्पति की घोषणा कर रहे तो क्या हमारे समाज सुधारक इतनी घोषणा करने का साहस रखते है कि वे जिस मंच से समाज सुधार की बाते कर रहे वे इन कुरीतियों से किनारा कर चुके है क्या! वे कतई नहीं कहेगे कि और बात से किनारा करेंगे। एक पुष्करना सज्जन ने यह तक कह दिया की उनका बेटा गोल्ड है और गोल्ड के भाव ही किसी घर का जंवाई बनेगा। अच्छे पढ़े लिखे पुष्करना युवाओ की कीमत बेटे वाले ही नहीं बेटी वाले भी आंक रहे है , जब ये समाज सुधारक मंच से नीचे उतरते है तो शादी के जोड़ बाकी में लग जाते है। अगर इन समाज सुधारको में साहस है तो वे आगे आये और बताये किस गरीब की बेटी को बहु बनाया है, कितनी सादगी से अपने बेटो का विवाह किया है, अगर दहेज़ और मिलानिया नहीं ली है तो समाज के सामने अपना उदहारण रखे ताकि हम उन्हें सम्मान भरी नजर से देखकर उनका अनुसरण कर सके।

Sunday, May 8, 2011

मुझे नहीं मालूम था कि आज मदर्स डे है, जब मालूम पड़ा तो मुझे मेरी माँ क़ी माताजी यानि मेरी नानी मुझे याद आ गयी। आज भी याद आता है जब में ननिहाल जाता था तो मुझे १ रूपया देती थी और मुझे ऐसा लगता था कि दुनिया सारी ख़ुशी उस एक रुपये में है। जीरे का तड़का लगा कर आलू की सब्जी बनाती थी, क्या स्वाद होता था और कोकम डाल कर दाल बनती थी । उस स्वाद और स्नेह को आज भी याद करता हूँ क्योकि मेरी नानी दुःख में रहकर भी मुझ पर स्नेह लुटाती थी। आज उस स्नेहमयी आत्मा को प्रणाम करता हूँ।

Saturday, April 30, 2011

कल मई महीना सुरू हो जाएगा और २८ मई को मेरा दूसरा जन्म दिन है मौत से सीधा सामना हुआ था लेकिन मुझे ख़ुशी नहीं उदासी लग रही है मैंने अपनी आँखों के सामने २ मासूम बच्चियों को दम तोड़ते देखा था और उनकी माँ सहित ७ जाने दम तोड़ चुके थे। २८/५/२००४ की दोपहर की घटना , कैसे भूलू.............वो दो खुबसूरत चहरे मुझे आज भी याद आते है। ३ से ५ साल के बीच थी वो दोनों फूल सी बच्चियाँ ............मेरे इश्वर! वो जन्हा भी हो खुश रहे........

Wednesday, April 27, 2011

धन्यवाद राज ठाकरे
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना चित्रपट कर्मचारी संगठन ने बिग बी की फिल्म ‘बुड्ढा’ की यूनाइटेड मिल्स में चल रही शूटिंग रुकवा दी। अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘बुड्ढा’ के एक डांस सीन में कुछ विदेशी कलाकार बिना वर्क परमिट के काम कर रहे हैं। इसके बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन को सूचना देकर फिल्म की शूटिंग रुकवा दी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार करीब २७ विदेशी डांसरों के पास वर्क परमिट नहीं पाया गया है।
इस खबर से स्पस्ट हो गया है की बॉलीवुड के निर्माता और निर्देशक गोरी चमड़ी की गन्दी मानसिकता का पालन पोषण कर रहे है। ये रंग भेद का सबसे बड़ा उदहारण है कि बॉलीवुड है की हरेक film ke गाने में विदेशी बलाए नाचती नजर आ जायेगी। भारतीय प्रतिभाए चित्रपट की कला को छोड़कर रोटी रोज़ी का दूसरा रास्ता अपना रहे है। धन्यवाद है राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ताओ को जिन्होंने विधि विरुद्ध कार्य करे विदेशी कलाकारों को पकड़ा और शूटिंग रूकवाई , बॉलीवुड का ये नया चेहरा कला और कलाकारों के लिए खतरनाक है जो भारतीय कलाकारों के फन की कब्र खोद रहा है और विदेशी लोगो को बगैर वर्क वीजा के बॉलीवुड में काम दे रहा है।

अगर समय के साथ हम नहीं चेते तो बॉलीवुड का ये नया रूप सिनेमा हाल में भारतीय कला की मजाक उडाएगा। धन्यवाद राज ठाकरे, आपके प्रयास को सलाम करता हूँ।